नई दिल्ली – सरकार रक्षा से जुड़े मामलों में लिखी जाने वाली किताबों के प्रकाशन पर नए और सख्त नियम बनाने पर विचार कर रही है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित संस्मरण किताब ‘Four Stars of Destiny’ के कथित लीक होने को लेकर विवाद तेज हो गया है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नरवणे की किताब के प्री‑प्रिंट या PDF के ऑनलाइन फैलने के मामले में एफआईआर दर्ज की है और प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया को नोटिस भी दिया गया है, यह पता लगाने के लिए कि यह लीक कैसे हुआ।
सरकार का कहना है कि रक्षा मामलों से जुड़ी किताब को प्रकाशित करने से पहले रक्षा मंत्रालय से क्लियरेंस लेना अनिवार्य है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी गलती से भी सार्वजनिक न हो। इस पर नए दिशानिर्देश और नियमों की मांग उठ रही है, जिसमें स्पष्ट जिम्मेदारियाँ और सख्त दंड शामिल हो सकते हैं।
लोकसभा में राहुल गांधी का पक्ष
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को संसद के वॉक फोरम तक पहुंचाया। बजट सत्र के दौरान उन्होंने संसद परिसर में नरवणे की किताब की एक प्रति दिखाते हुए सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसकी मौजूदगी सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह यह किताब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेंट करेंगे ताकि वे उसकी जानकारी लें।
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि क्योंकि किताब का टाइटल पहले ऑनलाइन प्री‑ऑर्डर के लिए दिखा था और नरवणे ने पहले अपनी किताब के बारे में ट्वीट भी किया था, इसलिए या तो पेंग्विन या नरवणे गलत बता रहे हैं। वे कहते हैं कि “मैं नरवणे जी पर भरोसा रखता हूँ।”
इस बयान की वजह से लोकसभा में हंगामा भी हुआ और सरकार दल के नेता और मंत्री यह तर्क दे रहे हैं कि संसद में अप्रकाशित किताब का हवाला देना नियमों के खिलाफ है क्योंकि उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित नहीं है।
बीजेपी ने राहुल गांधी पर हमला भी बोला है और मांग की है कि उन्हें अपने दावे पर माफी माँगनी चाहिए क्योंकि पेंग्विन और नरवणे दोनों ने स्पष्ट किया है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
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विवाद अब क्या बन गया है?
यह मामला अब सिर्फ एक लीक पुस्तक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस और सुरक्षा‑नियमों के संतुलन पर बड़ा विषय बन गया है। सरकार नई नियमावली तैयार करने पर विचार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रकाशित या संवेदनशील सामग्री के सार्वजनिक होने से पहले स्पष्ट प्रक्रिया हो, और रक्षा से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सके।
इस बीच दिल्ली पुलिस की जांच जारी है और राजनीतिक आरोप‑प्रत्यारोप भी बढ़ते जा रहे हैं, जिससे यह मुद्दा संसद के बाहर भी राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है।